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सावरकर की ‘हिंदुत्व’ विचारधारा की समीक्षा

28/05/2013

We need to think beyond the religion for the development of this country.

Discovery

प्रष्ठभूमि

हिंदुस्तान में किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेंस पहुँचाना बहुत ही आसान है – किसी चित्रकार की तस्वीर या कलाकार के चल-चित्र से ऐसा झट से किया जा सकता है| हम में से कुछ बुद्धि-जीव हैं जिनको सिर्फ उपरोक्त लिखे वाक्य से ही ठेंस पहुँच गयी होगी और वो हमें सउदी अरब जाकर ऐसा करने और परिणाम भुगदने का ताना देने लगेंगे| मैं तुरंत कान पकड़ कर माफ़ी मांगता हूँ – मुझे नहीं पता था की हिंदुस्तान की तुलना धर्म-तांत्रिक देशों से हो रही थी!

सामान्यतः हम सब इस बात से सहमत हैं की धार्मिक मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए – विकास से बड़ा और कोई मुद्दा नहीं होना चाहिए| परन्तु प्रजातंत्र में इस मुद्दे को राजनीति के दायरे से बाहर जाँचना लगभग नामुमकिन है| नेता और अभिनेता अपनी राजनीतिक और रचनात्मक आज़ादी का इस्तेमाल करते रहेंगे (और क्यों न करें?) और इन संगठनों, जो हमारे धार्मिक/वर्णीय प्रतिनिधि…

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